दूसरों की निन्दा-त्रुटियाँ सुनने में अपना समय नष्ट मत करो - doosro ki ninda trutiyaan sunne mein samay vyarth mat karo : प्रज्ञा सुभाषित
जिनके भीतर-बाहर एक ही बात है, वही निष्कपट व्यक्ति धन्य है - Jin ke bheetar bahar ek hi baat hai, ve nishkapat vyakti dhany hain. : प्रज्ञा सुभाषित
जो तुम दूसरों से चाहते हो, उसे पहले तुम स्वयं करो - jo tum doosro se chahte ho, use pahle swayam karo. : प्रज्ञा सुभाषित
अज्ञान और कुसंस्कारों से छूटना ही मुक्ति है - agyan aur kusanskaro se chhotna hi mukti hai. : प्रज्ञा सुभाषित
अज्ञानी वे हैं, जो कुमार्ग पर चलकर सुख की आशा करते हैं - agyani ve hain jo kumarg par chalakar sukh ki aasha karte hain. : प्रज्ञा सुभाषित
जो प्रेरणा पाप बनकर अपने लिए भयानक हो उठे, उसका परित्याग कर देना ही उचित है - jo prerna paap bankar apne liye bhayanak ho uthe, uska parityaag kar dena hi uchit hai. : प्रज्ञा सुभाषित
सब कुछ होने पर भी यदि मनुष्य के पास स्वास्थ्य नहीं, तो समझो उसके पास कुछ है ही नहीं - sab kuchh hone par bhi yadi manushya ke paas swasthya nahi hai to samjho uskie paas kuchh nahi hai. : प्रज्ञा सुभाषित
बुराई मनुष्य के बुरे कर्मों की नहीं, वरन् बुरे विचारों की देन होती है - buraai manushya ke buro karmo ki nahi, varan bure vicharo ki den hoti hai. : प्रज्ञा सुभाषित
जो बच्चों को सिखाते हैं, उन पर बड़े खुद अमल करें, तो यह संसार स्वर्ग बन जाय - jo bachcho ko sikhate hain, un par khud amal karein to yah sansar swarg ban jaye. : प्रज्ञा सुभाषित
जीवन का अर्थ है समय। जो जीवन से प्यार करते हों, वे आलस्य में समय न गँवाएँ - jeevan ka arth hai samay. jo jeevan se pyar karte hain ve alasya me samay na ganvaate. : प्रज्ञा सुभाषित
अस्त-व्यस्त रीति से समय गँवाना अपने ही पैरों कुल्हाड़ी मारना है - ast vyast reeti se samay ganvaana apne hi pairo par kulhadi maarne jaisa hai. : प्रज्ञा सुभाषित
ईमानदार होने का अर्थ है-हजार मनकों में अलग चमकने वाला हीरा - imaandar hone ka arth hai hazaro manko mer alag chamkane wala heera. : प्रज्ञा सुभाषित
वही उन्नति कर सकता है, जो स्वयं को उपदेश देता है - vahi unati kar sakta hai jo swayam ko updesh deta hai. : प्रज्ञा सुभाषित
संसार में हर वस्तु में अच्छे और बुरे दो पहलू हैं, जो अच्छा पहलू देखते हैं वे अच्छाई और जिन्हें केवल बुरा पहलू देखना आता है वह बुराई संग्रह करते हैं - sansaar me har vastu ke do pahloo hain jo achcha pahloo dekhte hain ve achchai aur jo bura pahloo dekhte hain ve burai ka sangrah karte hain. : प्रज्ञा सुभाषित
अधिक इच्छाएँ प्रसन्नता की सबसे बड़ी शत्रु हैं - adhik ichchaye prasannata ki sabse badi shatru hain. : प्रज्ञा सुभाषित
बुद्धिमान् बनने का तरीका यह है कि आज हम जितना जानते हैं भविष्य में उससे अधिक जानने के लिए प्रयत्नशील रहें - buddhiman banne ka tareeka yah hai ki aaj hum jitna jaaante hai bhavishya me usse adhik janne ke liye prayatnasheel rahin. : प्रज्ञा सुभाषित
वह मनुष्य विवेकवान् है, जो भविष्य से न तो आशा रखता है और न भयभीत ही होता है - vah manushya vivekvaan hai jo bhavishya se na to aasha rakhta hai aur na hi bhaybheet hota hai. : प्रज्ञा सुभाषित
जो व्यक्ति कभी कुछ कभी कुछ करते हैं, वे अन्तत: कहीं भी नहीं पहुँच पाते - jo vyakti kabhi kuchh to kabhi kuchh karte hain ve antatah kahin bhi nahi pahunch paate. : प्रज्ञा सुभाषित
जिस दिन, जिस क्षण किसी के अंदर बुरा विचार आये अथवा कोई दुष्कर्म करने की प्रवृत्ति उपजे, मानना चाहिए कि वह दिन-वह क्षण मनुष्य के लिए अशुभ है - jis din jis kshan kisi ke andar bura vichar aaye athva koi dushkarm karne ki pravritti upje, manna chahiye ki wahi kshan manushya ke liye ashubh hai. : प्रज्ञा सुभाषित
किसी से इर्ष्या करके मनुष्य उसका तो कुछ बिगाड़ नहीं सकता है, पर अपनी निद्रा और अपना सुख-संतोष अवश्य खो देता है - kisi se irshya karke manushya uska to kuchh nahi bigaad sakta par apni nidra, apa sukh aur apna santosh avashya kho deta hai. : प्रज्ञा सुभाषित
जो मन की शक्ति के बादशाह होते हैं, उनके चरणों पर संसार नतमस्तक होता है - jo man ki shakti ke badshaah hote hain, unke charno par sansaar natmastak hota hai. : प्रज्ञा सुभाषित
ज्ञान और आचरण में जो सामंजस्य पैदा कर सके, उसे ही विद्या कहते हैं - gyaan aur acharan me jo samanjasya paida kar sake use hi vidya kahte hain. : प्रज्ञा सुभाषित
इतराने में नहीं, श्रेष्ठ कार्यों में ऐश्वर्य का उपयोग करो - itraane me nahi shreshta karyo me aishwarya ka upyog karein : प्रज्ञा सुभाषित
उनसे दूर रहो जो भविष्य को निराशाजनक बताते है - unse door raho jo bhavishya klo nirashajanak batate hain. : प्रज्ञा सुभाषित