मैं अपनी ज़िन्दगी जितना संभव हो उतने स्वाभाविक और सामान्य तरीके से व्यतीत कर सकता हूँ। लेकिन अगर दिन रात विवाद मेरे पीछे पड़े रहें तो मैं इसका कुछ नहीं कर सकता। मुझे कभी-कभी आश्चर्य होता है कि वे किस तरह ये सब करते हैं। मैं दाढ़ी बढ़ता हूँ और वह टाइम्स ऑफ़ इंडिया के सम्पादकीय में आ जाता है - main apni zindagi jitana sambhav ho utane svabhavik aur samany tarike se vyatit kar sakta hoon. lekin agar din raat vivad mere pichhe pade rahen to main isaka kuchh nahin kar sakta. mujhe kabhi-kabhi ashchary hota hai ki ve kis tarah ye sab karte hain. main dadhi badhata hoon aur vah times of india mein aa jaata hai : अमिताभ बच्चन

मैं अपनी ज़िन्दगी जितना संभव हो उतने स्वाभाविक और सामान्य तरीके से व्यतीत कर सकता हूँ।  लेकिन अगर दिन रात विवाद मेरे पीछे पड़े रहें तो मैं इसका कुछ नहीं कर सकता। मुझे कभी-कभी आश्चर्य होता है कि वे किस तरह ये सब करते हैं।  मैं दाढ़ी बढ़ता हूँ और वह टाइम्स ऑफ़ इंडिया के सम्पादकीय में आ जाता है। : Main apni zindagi jitana sambhav ho utane svabhavik aur samany tarike se vyatit kar sakta hoon. lekin agar din raat vivad mere pichhe pade rahen to main isaka kuchh nahin kar sakta. mujhe kabhi-kabhi ashchary hota hai ki ve kis tarah ye sab karte hain. main dadhi badhata hoon aur vah times of india mein aa jaata hai - अमिताभ बच्चन

मैं यह नहीं कहूँगा कि मैं 1000 बार असफल हुआ, मैं यह कहूँगा कि ऐसे 1000 रास्ते हैं जो आपको सफलता से दूर ले जाते हैं - main yah nahi kahunga ki 1000 baar asafal hua, main yah kahunga ki aise 1000 raaste hain jo aapko safalta se door le jaate hain. : थॉमस अल्वा एडिसन

मैं यह नहीं कहूँगा कि मैं 1000 बार असफल हुआ, मैं यह कहूँगा कि ऐसे 1000 रास्ते हैं जो आपको सफलता से दूर ले जाते हैं। : Main yah nahi kahunga ki 1000 baar asafal hua, main yah kahunga ki aise 1000 raaste hain jo aapko safalta se door le jaate hain. - थॉमस अल्वा एडिसन

नमाज़ की फ़िक्र अपने ऊपर फ़र्ज़ करलो..!! खुदा की कसम दुनिया की फ़िक्र से आज़ाद हो जाओगे,और क़ामयाबी तुम्हारे क़दम चूमेंगी - namaaz ki fikr apne upar farz karlo, khuda ki kasam duniya ki fikr se azad ho jaoge, aur kamayaabi tumhare kadam chumengi : हजरत अली

नमाज़ की फ़िक्र अपने ऊपर फ़र्ज़ करलो..!! खुदा की कसम दुनिया की फ़िक्र से आज़ाद हो जाओगे,और क़ामयाबी तुम्हारे क़दम चूमेंगी। : Namaaz ki fikr apne upar farz karlo, khuda ki kasam duniya ki fikr se azad ho jaoge, aur kamayaabi tumhare kadam chumengi - हजरत अली

अपने जिस्म को ज़रूरत से ज़्यादा न सवारों,क्योंकि इसे तो मिट्टी में मिल जाना है, सवॉरना है तो अपनी रूह को सवॉरों क्योंकि इसे तुम्हारे रब के पास जाना है - apne jism ko zarurat se zyada na savaron, kyonki ise to mitti mein mil jaana hai, savarna hai to apni rooh ko savaron kyonki ise tumhare rab ke paas jaana hai. : हजरत अली

अपने जिस्म को ज़रूरत से ज़्यादा न सवारों,क्योंकि इसे तो मिट्टी में मिल जाना है, सवॉरना है तो अपनी रूह को सवॉरों क्योंकि इसे तुम्हारे रब के पास जाना है। : Apne jism ko zarurat se zyada na savaron, kyonki ise to mitti mein mil jaana hai, savarna hai to apni rooh ko savaron kyonki ise tumhare rab ke paas jaana hai. - हजरत अली

जो लोग सिर्फ तुम्हे काम के वक़्त याद करते हे उन लोगो के काम ज़रूर आओ क्यों के वो अंधेरो में रौशनी ढूँढ़ते हे और वो रौशनी तुम हो - jo log sirf tumhe kaam ke waqt yaad karte hai un logo ke kaam zaroor aao kyon ke wo andheron mein roshani dhundte hai aur wo roshani tum ho : हजरत अली

जो लोग सिर्फ तुम्हे काम के वक़्त याद करते हे उन लोगो के काम ज़रूर आओ क्यों के वो अंधेरो में रौशनी ढूँढ़ते हे और वो रौशनी तुम हो : Jo log sirf tumhe kaam ke waqt yaad karte hai un logo ke kaam zaroor aao kyon ke wo andheron mein roshani dhundte hai aur wo roshani  tum ho - हजरत अली