किसी को “क्रांति ” शब्द की व्याख्या शाब्दिक अर्थ में नहीं करनी चाहिए। जो लोग इस शब्द का उपयोग या दुरूपयोग करते हैं उनके फायदे के हिसाब से इसे अलग अलग अर्थ और अभिप्राय दिए जाते है - kisi ko kranti shabd ki vyakhya shabdik ath me nahi karni chahiye. jo log iska durupyog karte hain unke faayde ke hisaab se iske alag alag arth aur abhipraay diyejaate hain. : सरदार भगत सिंह

किसी को “क्रांति ” शब्द की व्याख्या शाब्दिक अर्थ में नहीं करनी चाहिए। जो लोग इस शब्द का उपयोग या दुरूपयोग करते हैं उनके फायदे के हिसाब से इसे अलग अलग अर्थ और अभिप्राय दिए जाते है। : Kisi ko kranti shabd ki vyakhya shabdik ath me nahi karni chahiye. jo log iska durupyog karte hain unke faayde ke hisaab se iske alag alag arth aur abhipraay diyejaate hain. - सरदार भगत सिंह

यदि बहरों को सुनना है तो आवाज़ को बहुत जोरदार होना होगा. जब हमने बम गिराया तो हमारा धेय्य किसी को मारना नहीं था। हमने अंग्रेजी हुकूमत पर बम गिराया था। अंग्रेजों को भारत छोड़ना चाहिए और उसे आज़ाद करना चहिए - yadi bahro ko sunana hai to aawaz ko zordar hona hoga . jab humne bamb giraaya to hamar dhyey kisi ko maarna nahitha, humne angrezi hukoomatpar bomb giraya tha. aagrezon ko bharat azzaad kar use chhodkar chale jana chahiye. : सरदार भगत सिंह

यदि बहरों को सुनना है तो आवाज़ को बहुत जोरदार होना होगा. जब हमने बम गिराया तो हमारा धेय्य किसी को मारना नहीं था। हमने अंग्रेजी हुकूमत पर बम गिराया था। अंग्रेजों को भारत छोड़ना चाहिए और उसे आज़ाद करना चहिए। : Yadi bahro ko sunana hai to aawaz ko zordar hona hoga . jab humne bamb giraaya to hamar dhyey kisi ko maarna nahitha, humne angrezi hukoomatpar bomb giraya tha. aagrezon ko bharat azzaad kar use chhodkar chale jana chahiye. - सरदार भगत सिंह

मैं इस बात पर जोर देता हूँ कि मैं महत्त्वाकांक्षा, आशा और जीवन के प्रति आकर्षण से भरा हुआ हूँ. पर मैं ज़रुरत पड़ने पर ये सब त्याग सकता हूँ, और वही सच्चा बलिदान है - main is baat pe zor deta hu ki mahatvakanksha, aasha aur jeevan ke prati aakarshan se bhara hua hoon. par main jaroorat padne par ye sab tyaag sakta hu aur sachche artho mein yahi balidaan hai. : सरदार भगत सिंह

मैं इस बात पर जोर देता हूँ कि मैं महत्त्वाकांक्षा, आशा और जीवन के प्रति आकर्षण से भरा हुआ हूँ. पर मैं ज़रुरत पड़ने पर ये सब त्याग सकता हूँ, और वही सच्चा बलिदान है। : Main is baat pe zor deta hu ki mahatvakanksha, aasha aur jeevan ke prati aakarshan se bhara hua hoon. par main jaroorat padne par ye sab tyaag sakta hu aur sachche artho mein yahi balidaan hai. - सरदार भगत सिंह

आम तौर पर लोग चीजें जैसी हैं उसके आदी हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की ज़रुरत है - aamtaur p ye cheeze jaisi hain uske aadi ho jate hain aur badlaav ke vichar se hi kaanpne lagte hain. humein is nishkriyta ki bhavna ko krantikari bhavna me badlne ki jaroorat hai. : सरदार भगत सिंह

आम तौर पर लोग चीजें जैसी हैं उसके आदी हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की ज़रुरत है। : Aamtaur p ye cheeze jaisi hain uske aadi ho jate hain aur badlaav ke vichar se hi kaanpne lagte hain. humein is nishkriyta ki bhavna ko krantikari bhavna me badlne ki jaroorat hai. - सरदार भगत सिंह

इंसान तभी कुछ करता है जब वो अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है, जैसाकि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे - insaan tabhi kuchhkarta hai jab wo apne kaam ke auchitya ko lekar sunishchit hota hai, jaise hum vidhansabha meinbomb fenkne ko lekar the. : सरदार भगत सिंह

इंसान तभी कुछ करता है जब वो अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है, जैसाकि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे। : Insaan tabhi kuchhkarta hai jab wo apne kaam ke auchitya ko lekar sunishchit hota hai, jaise hum vidhansabha meinbomb fenkne ko lekar the. - सरदार भगत सिंह

बुराई इसलिए नहीं बढती की बुरे लोग बढ़ गए है बल्कि बुराई इसलिए बढती है क्योंकि बुराई सहन करने वाले लोग बढ़ गये है - buraai isliye nahi badhti ki bure log badh gye hain, balki isliye badhti hai ki buraai sahne waale log jyad ho gye hain. : सरदार भगत सिंह

बुराई इसलिए नहीं बढती की बुरे लोग बढ़ गए है बल्कि बुराई इसलिए बढती है क्योंकि बुराई सहन करने वाले लोग बढ़ गये है। : Buraai isliye nahi badhti ki bure log badh gye hain, balki isliye badhti hai ki buraai sahne waale log jyad ho gye hain. - सरदार भगत सिंह