मैं इस बात पर जोर देता हूँ कि मैं महत्त्वाकांक्षा, आशा और जीवन के प्रति आकर्षण से भरा हुआ हूँ. पर मैं ज़रुरत पड़ने पर ये सब त्याग सकता हूँ, और वही सच्चा बलिदान है - main is baat pe zor deta hu ki mahatvakanksha, aasha aur jeevan ke prati aakarshan se bhara hua hoon. par main jaroorat padne par ye sab tyaag sakta hu aur sachche artho mein yahi balidaan hai. : सरदार भगत सिंह

मैं इस बात पर जोर देता हूँ कि मैं महत्त्वाकांक्षा, आशा और जीवन के प्रति आकर्षण से भरा हुआ हूँ. पर मैं ज़रुरत पड़ने पर ये सब त्याग सकता हूँ, और वही सच्चा बलिदान है। : Main is baat pe zor deta hu ki mahatvakanksha, aasha aur jeevan ke prati aakarshan se bhara hua hoon. par main jaroorat padne par ye sab tyaag sakta hu aur sachche artho mein yahi balidaan hai. - सरदार भगत सिंह

आम तौर पर लोग चीजें जैसी हैं उसके आदी हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की ज़रुरत है - aamtaur p ye cheeze jaisi hain uske aadi ho jate hain aur badlaav ke vichar se hi kaanpne lagte hain. humein is nishkriyta ki bhavna ko krantikari bhavna me badlne ki jaroorat hai. : सरदार भगत सिंह

आम तौर पर लोग चीजें जैसी हैं उसके आदी हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की ज़रुरत है। : Aamtaur p ye cheeze jaisi hain uske aadi ho jate hain aur badlaav ke vichar se hi kaanpne lagte hain. humein is nishkriyta ki bhavna ko krantikari bhavna me badlne ki jaroorat hai. - सरदार भगत सिंह

इंसान तभी कुछ करता है जब वो अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है, जैसाकि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे - insaan tabhi kuchhkarta hai jab wo apne kaam ke auchitya ko lekar sunishchit hota hai, jaise hum vidhansabha meinbomb fenkne ko lekar the. : सरदार भगत सिंह

इंसान तभी कुछ करता है जब वो अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है, जैसाकि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे। : Insaan tabhi kuchhkarta hai jab wo apne kaam ke auchitya ko lekar sunishchit hota hai, jaise hum vidhansabha meinbomb fenkne ko lekar the. - सरदार भगत सिंह

जो व्यक्ति विकास के लिए खड़ा है उसे हर एक रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी, उसमें अविश्वास करना होगा तथा उसे चुनौती देनी होगी - jo vyakti vikaas ke liye khadaa hai use har rudhivaadi cheez kiaalochna karni hogi, usme avishvaas karna hoga tatha use chunauti deni hogi. : सरदार भगत सिंह

जो व्यक्ति विकास के लिए खड़ा है उसे हर एक रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी, उसमें अविश्वास करना होगा तथा उसे चुनौती देनी होगी। : Jo vyakti vikaas ke liye khadaa hai use har rudhivaadi cheez kiaalochna karni hogi, usme avishvaas karna hoga tatha use chunauti deni hogi. - सरदार भगत सिंह