बोधविचार - प्रेरक, ज्ञानपूर्ण व बेहतरीन विचारों का संग्रह

यदि कोई एक व्यक्ति को भी ऐसा रह गया जिसे किसी रूप में अछूत कहा जाए तो भारत को अपना सर शर्म से झुकाना पड़ेगा. - yadi koi bhi vyakti esa rah gya ho jise kisi a kisi roop mein achhoot kaha jaay to bharat ko apna sarsharm se jhukana hoga : लाल बहादुर शास्त्री

यदि कोई एक व्यक्ति को भी ऐसा रह गया जिसे किसी रूप में अछूत कहा जाए तो भारत को अपना सर शर्म से झुकाना पड़ेगा. : Yadi koi bhi vyakti esa rah gya ho jise kisi a kisi roop mein achhoot kaha jaay to bharat ko apna sarsharm se jhukana hoga - लाल बहादुर शास्त्री

आपका दोष क्षमता की कमी या साधनों की कमी की दृष्टि से नहीं है, वरन दोष इस बात मे है कि आप में संकल्प का अभाव है। आपने उस संकल्प को अपने मे उत्पन्न नहीं किया है जो आपको पहले ही उत्पन्न कर लेना था। संकल्प ही सब कुछ है। आपको संकल्प शक्ति इतना साहस दे सकती है कि आपको लक्ष्य पाने से कोई नहीं रोक सकता - aapka doshkshamta ki kami ya saadhno ki kami ki drishti se ahi hai balki dosh is baat me hai ki aapme sankalp lene ka abhaav hai. : बाल गंगाधर तिलक

आपका दोष क्षमता की कमी या साधनों की कमी की दृष्टि से नहीं है, वरन दोष इस बात मे है कि आप में संकल्प का अभाव है। आपने उस संकल्प को अपने मे उत्पन्न नहीं किया है जो आपको पहले ही उत्पन्न कर लेना था। संकल्प ही सब कुछ है। आपको संकल्प शक्ति इतना साहस दे सकती है कि आपको लक्ष्य पाने से कोई नहीं रोक सकता। : Aapka doshkshamta ki kami ya saadhno ki kami ki drishti se ahi hai balki dosh is baat me hai ki aapme sankalp lene  ka abhaav hai. - बाल गंगाधर तिलक

उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो। तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो। तुम तत्व नहीं हो, तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो - utho mere shero, is bhram ko mita do ki tum nirbal ho. tum ek amar aatma ho, svachchhand jeev ho, dhany ho, sanaatan ho. tum tatv nahin ho, tatv tumhaara sevak hai tum tatv ke sevak nahin ho : स्वामी विवेकानन्द

उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो। तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो। तुम तत्व नहीं हो, तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो : Utho mere shero, is bhram ko mita do ki tum nirbal ho. tum ek amar aatma ho, svachchhand jeev ho, dhany ho, sanaatan ho. tum tatv nahin ho, tatv tumhaara sevak hai tum tatv ke sevak nahin ho - स्वामी विवेकानन्द