नेतृत्व पहले विशुद्ध रूप से सेवा का मार्ग था। एक कष्ट साध्य कार्य जिसे थोड़े से सक्षम व्यक्ति ही कर पाते थे - netritva ka vishuddha roop seva ka marg tha, ek kasht sadhya karya jise thode se sksham vyakti hi kar paate the. : प्रज्ञा सुभाषित

नेतृत्व पहले विशुद्ध रूप से सेवा का मार्ग था। एक कष्ट साध्य कार्य जिसे थोड़े से सक्षम व्यक्ति ही कर पाते थे। : Netritva ka vishuddha roop seva ka marg tha, ek kasht sadhya karya jise thode se sksham vyakti hi kar paate the. - प्रज्ञा सुभाषित

संसार में हर वस्तु में अच्छे और बुरे दो पहलू हैं, जो अच्छा पहलू देखते हैं वे अच्छाई और जिन्हें केवल बुरा पहलू देखना आता है वह बुराई संग्रह करते हैं - sansaar me har vastu ke do pahloo hain jo achcha pahloo dekhte hain ve achchai aur jo bura pahloo dekhte hain ve burai ka sangrah karte hain. : प्रज्ञा सुभाषित

संसार में हर वस्तु में अच्छे और बुरे दो पहलू हैं, जो अच्छा पहलू देखते हैं वे अच्छाई और जिन्हें केवल बुरा पहलू देखना आता है वह बुराई संग्रह करते हैं। : Sansaar me har vastu ke do pahloo hain jo achcha pahloo dekhte hain ve achchai aur jo bura pahloo dekhte hain ve burai ka sangrah karte hain. - प्रज्ञा सुभाषित