समाज का मार्गदर्शन करना एक गुरुतर दायित्व है, जिसका निर्वाह हर कोई नहीं कर सकता।

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समाज का मार्गदर्शन करना एक गुरुतर दायित्व है, जिसका निर्वाह हर कोई नहीं कर सकता। : Samaj ka -margdarshan karna ek guruttar daayitva hai, jiska nirvaah har koi nahi kar sakta . - प्रज्ञा सुभाषितसमाज का मार्गदर्शन करना एक गुरुतर दायित्व है, जिसका निर्वाह हर कोई नहीं कर सकता। : Samaj ka -margdarshan karna ek guruttar daayitva hai, jiska nirvaah har koi nahi kar sakta . - प्रज्ञा सुभाषित

samaj ka -margdarshan karna ek guruttar daayitva hai, jiska nirvaah har koi nahi kar sakta . | समाज का मार्गदर्शन करना एक गुरुतर दायित्व है, जिसका निर्वाह हर कोई नहीं कर सकता।