एकमात्र एक ऐसी बात जो हमें पशु से अलग करती है वो है अहिंसा| मानव बनने के लिए अहिंसक होना जरुरी है| - ekmatra esi baat jo humein pashu se alag karti hai wo hai ahinsa. maana bannne ke liye ahinsak hona jarori hai. : महात्मा गाँधी

एकमात्र एक ऐसी बात जो हमें पशु से अलग करती है वो है अहिंसा| मानव बनने के लिए अहिंसक होना जरुरी है| : Ekmatra esi baat jo humein pashu se alag karti hai wo hai ahinsa. maana bannne ke liye ahinsak hona jarori hai. - महात्मा गाँधी

स्वच्छता को अपने आचरण में इस तरह अपना लो कि वह आपकी आदत बन जाए | शौचालय को रसोई घर की तरह साफ होना चाहिए| - swachchata ko apne aacharan me is tarah apna lo ki wah aapki aadat ban jaaye. aapka shauchalay bhi aape rasoighar ki tarah saf hona chahiye. : महात्मा गाँधी

स्वच्छता को अपने आचरण में इस तरह अपना लो कि वह आपकी आदत बन जाए | शौचालय को रसोई घर की तरह साफ होना चाहिए| : Swachchata ko apne aacharan me is tarah apna lo ki wah aapki aadat ban jaaye. aapka shauchalay bhi aape rasoighar ki tarah saf hona chahiye. - महात्मा गाँधी

हर इंसान के अंदर अपनी गलतियों को स्वीकारने और उन्हें सुधारने की पर्याप्त विनम्रता होती है. - har insaan ke andar apni galtiyo ko sweekarne aur unkosudharne ki paryapt vinamrata hoti hai. : महात्मा गाँधी

हर इंसान के अंदर अपनी गलतियों को स्वीकारने और उन्हें सुधारने की पर्याप्त विनम्रता होती है. : Har insaan ke andar apni galtiyo ko sweekarne aur unkosudharne ki paryapt vinamrata hoti hai. - महात्मा गाँधी

आपकी आत्मा से परे कोई भी शत्रु नहीं है। असली शत्रु आपके भीतर रहते हैं, वो शत्रु हैं क्रोध, घमंड, लालच,आसक्ति और नफरत - aapki aatma se pare koi bhi shatru nahi hai. asli shatru aapke bheetr rahte hain , ve shatru hain - krodh, ghamand, laalach, aasakti aur nafrat. : महावीर स्वामी

आपकी आत्मा से परे कोई भी शत्रु नहीं है। असली शत्रु आपके भीतर रहते हैं, वो शत्रु हैं क्रोध, घमंड, लालच,आसक्ति और नफरत। : Aapki aatma se pare koi bhi shatru nahi hai. asli shatru aapke bheetr rahte hain , ve shatru hain - krodh, ghamand, laalach, aasakti aur nafrat. - महावीर स्वामी

मनुष्य नश्वर हैं। ऐसे ही विचार होते हैं। एक विचार को प्रचार-प्रसार की जरूरत है जैसे एक पौधे में पानी की जरूरत होती है। अन्यथा दोनों मुरझा जायेंगे और मर जायेंगे - manushya nashwar hai. ese vichaar hote hain. ek vichaar ko prachar prasaar ki jaroorat hai jase paudhon ko paani-khaad ki jaroorat hoti hai. anyatha dono murjha jaayenge aur mar jaayenge : डॉ॰ बी॰ आर॰ अम्बेडकर

मनुष्य नश्वर हैं। ऐसे ही विचार होते हैं। एक विचार को प्रचार-प्रसार की जरूरत है जैसे एक पौधे में पानी की जरूरत होती है। अन्यथा दोनों मुरझा जायेंगे और मर जायेंगे। : Manushya nashwar hai. ese vichaar hote hain. ek vichaar ko prachar prasaar ki jaroorat hai jase paudhon ko paani-khaad ki jaroorat hoti hai. anyatha dono murjha jaayenge aur mar jaayenge - डॉ॰ बी॰ आर॰ अम्बेडकर

सौभाग्य उन्हीं को प्राप्त होता है, जो अपने कर्तव्य पथ पर अविचल रहते हैं - saubhagya unhi ko prapt hota hai jo apne kartavy path par avichal rahe hain. : मुंशी प्रेमचंद

सौभाग्य उन्हीं को प्राप्त होता है, जो अपने कर्तव्य पथ पर अविचल रहते हैं। : Saubhagya unhi ko prapt hota hai jo apne kartavy path par avichal rahe hain. - मुंशी प्रेमचंद

हमारे जीवन का प्रथम लक्ष्य है दूसरों की सहायता करना। और यदि आप दूसरों की सहायता नहीं कर सकते तो कम से कम उन्हें आहत तो न करें - hamare jeevan ka pratham lakshya hai doosro ki sahayta karna aur yadi aap doosro ki sahayta nahi kar rahe to kam se kam unhe aahat to naa karrin : अज्ञात

हमारे जीवन का प्रथम लक्ष्य है दूसरों की सहायता करना। और यदि आप दूसरों की सहायता नहीं कर सकते तो कम से कम उन्हें आहत तो न करें। : Hamare jeevan ka pratham lakshya hai doosro ki sahayta karna aur yadi aap doosro ki sahayta nahi kar rahe to kam se kam unhe aahat to naa karrin - अज्ञात

विवेकशील व्यक्ति उचित अनुचित पर विचार करता है और अनुचित को किसी भी मूल्य पर स्वीकार नहीं करता - viveksheel vyakti uchit anuchit par vichar karta hau aur anuchit ko kisi bhi moolya par sweekar nahi karta : प्रज्ञा सुभाषित

विवेकशील व्यक्ति उचित अनुचित पर विचार करता है और अनुचित को किसी भी मूल्य पर स्वीकार नहीं करता। : Viveksheel vyakti uchit anuchit par vichar karta hau aur anuchit ko kisi bhi moolya par sweekar nahi karta - प्रज्ञा सुभाषित

स्वास्थ्य सबसे महान उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन तथा विश्वसनीयता सबसे अच्छा संबंध है - swasthya sabse mahan uphar hai, santoshsabse bda dhan tatha vishwashneeyta sabse achcha sambandh. : गौतम बुद्ध

स्वास्थ्य सबसे महान उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन तथा विश्वसनीयता सबसे अच्छा संबंध है। : Swasthya sabse mahan uphar hai, santoshsabse bda dhan tatha vishwashneeyta sabse achcha sambandh. - गौतम बुद्ध