केवल ज्ञान ही एक ऐसा अक्षय तत्त्व है, जो कहीं भी, किसी अवस्था और किसी काल में भी मनुष्य का साथ नहीं छोड़ता - keval gyaan hi ek aisa akshay tatva hai, jo kahin bhi kisi bhi avastha me kisi bhi kaal me sath nahi chhodta. : प्रज्ञा सुभाषित

केवल ज्ञान ही एक ऐसा अक्षय तत्त्व है, जो कहीं भी, किसी अवस्था और किसी काल में भी मनुष्य का साथ नहीं छोड़ता। : Keval gyaan hi ek aisa akshay tatva hai, jo kahin bhi kisi bhi avastha me kisi bhi kaal me sath nahi chhodta. - प्रज्ञा सुभाषित

महानता का गुण न तो किसी के लिए सुरक्षित है और न प्रतिबंधित। जो चाहे अपनी शुभेच्छाओं से उसे प्राप्त कर सकता है - mahanta ka gun na to kisi ke liye sukshit hai aur na hi pratibandhit, jo chahe svechcha se use prapt kar sakta hai. : प्रज्ञा सुभाषित

महानता का गुण न तो किसी के लिए सुरक्षित है और न प्रतिबंधित। जो चाहे अपनी शुभेच्छाओं से उसे प्राप्त कर सकता है। : Mahanta ka gun na to kisi ke liye sukshit hai aur na hi pratibandhit, jo chahe svechcha se use prapt kar sakta hai. - प्रज्ञा सुभाषित

मनुष्य दु:खी, निराशा, चिंतित, उदिग्न बैठा रहता हो तो समझना चाहिए सही सोचने की विधि से अपरिचित होने का ही यह परिणाम है| - manushya dukhi, niraas, chintit, udigna baitha rahta ho to samjhna chahiye sahi sochne ki vidhi se aparichit hone ka hi yah parinaam hai. : प्रज्ञा सुभाषित

मनुष्य दु:खी, निराशा, चिंतित, उदिग्न बैठा रहता हो तो समझना चाहिए सही सोचने की विधि से अपरिचित होने का ही यह परिणाम है| : Manushya dukhi, niraas, chintit, udigna baitha rahta ho to samjhna chahiye sahi sochne ki vidhi se aparichit hone ka hi yah parinaam hai. - प्रज्ञा सुभाषित

आदर्शों के प्रति श्रद्धा और कर्तव्य के प्रति लगन का जहाँ भी उदय हो रहा है, समझना चाहिए कि वहाँ किसी देवमानव का आविर्भाव हो रहा है - aadarsho ke prati shraddha aur kartavya ke prati lagan ka jahan bhi uaday ho raha hai, samajhana chahiye ki wahan kisi devmanaav ka avirbhav hao raha hai. : प्रज्ञा सुभाषित

आदर्शों के प्रति श्रद्धा और कर्तव्य के प्रति लगन का जहाँ भी उदय हो रहा है, समझना चाहिए कि वहाँ किसी देवमानव का आविर्भाव हो रहा है। : Aadarsho ke prati shraddha aur kartavya ke prati lagan ka jahan bhi uaday ho raha hai, samajhana chahiye ki wahan kisi devmanaav ka avirbhav hao raha hai. - प्रज्ञा सुभाषित

हर इन्सान के अंदर दो गुण होते है एक अच्छा और एक बुरा और इन्सान जिस पर अपना ध्यान लगाएगा वैसा ही बन जायेगा - har insaan ke andar do gun hote hain ek achcha aur ek bura aur jis par insaan dhyan lagayega waisa hi ban jayega. : नरेन्द्र दामोदरदास मोदी

हर इन्सान के अंदर दो गुण होते है एक अच्छा और एक बुरा और इन्सान जिस पर अपना ध्यान लगाएगा वैसा ही बन जायेगा। : Har insaan ke andar do gun hote hain ek achcha aur ek bura aur jis par insaan dhyan lagayega waisa hi ban jayega. - नरेन्द्र दामोदरदास मोदी