आदर्शों के प्रति श्रद्धा और कर्तव्य के प्रति लगन का जहाँ भी उदय हो रहा है, समझना चाहिए कि वहाँ किसी देवमानव का आविर्भाव हो रहा है।

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आदर्शों के प्रति श्रद्धा और कर्तव्य के प्रति लगन का जहाँ भी उदय हो रहा है, समझना चाहिए कि वहाँ किसी देवमानव का आविर्भाव हो रहा है। : Aadarsho ke prati shraddha aur kartavya ke prati lagan ka jahan bhi uaday ho raha hai, samajhana chahiye ki wahan kisi devmanaav ka avirbhav hao raha hai. - प्रज्ञा सुभाषितआदर्शों के प्रति श्रद्धा और कर्तव्य के प्रति लगन का जहाँ भी उदय हो रहा है, समझना चाहिए कि वहाँ किसी देवमानव का आविर्भाव हो रहा है। : Aadarsho ke prati shraddha aur kartavya ke prati lagan ka jahan bhi uaday ho raha hai, samajhana chahiye ki wahan kisi devmanaav ka avirbhav hao raha hai. - प्रज्ञा सुभाषित

aadarsho ke prati shraddha aur kartavya ke prati lagan ka jahan bhi uaday ho raha hai, samajhana chahiye ki wahan kisi devmanaav ka avirbhav hao raha hai. | आदर्शों के प्रति श्रद्धा और कर्तव्य के प्रति लगन का जहाँ भी उदय हो रहा है, समझना चाहिए कि वहाँ किसी देवमानव का आविर्भाव हो रहा है।