उनकी प्रशंसा करो जो धर्म पर दृढ़ हैं। उनके गुणगान न करो, जिनने अनीति से सफलता प्राप्त की - unki prashansa karo jo dharm par dridh ho, unke gungaan na karo jo aneeti se safalta prapt karte hain : प्रज्ञा सुभाषित
अपने दोषों से सावधान रहो; क्योंकि यही ऐसे दुश्मन है, जो छिपकर वार करते हैं - apne dosho se savdhaan raho kyonki yehi ese dushman hain jo chhipkar waar karte hain : प्रज्ञा सुभाषित
संसार का सबसे बड़ा दीवालिया वह है, जिसने उत्साह खो दिया - sansaar ka sabse bada diwaliya hai jisne utsaah kho diya ho : प्रज्ञा सुभाषित
बड़प्पन सुविधा संवर्धन का नहीं, सद्गुण संवर्धन का नाम है - badappan suvidha samvardhan ka nahi sadgun samvardhan ka naam hai : प्रज्ञा सुभाषित
जो सच्चाई के मार्ग पर चलता है, वह भटकता नहीं - jo sachchai ke marg par chalta hai, vah bhatakta nahi : प्रज्ञा सुभाषित
ज्ञान के नेत्र हमें अपनी दुर्बलता से परिचित कराने आते हैं। जब तक इंद्रियों में सुख दीखता है, तब तक आँखों पर पर्दा हुआ मानना चाहिए - gyaan ke naitra humein apn durbalta se parichit karane aate hain. jab tak indriyon me sukh dikhta hai tab tak aankho par parda hua maanana chahiye : प्रज्ञा सुभाषित
राष्ट्रीय स्तर की व्यापक समस्याएँ नैतिक दृष्टि धूमिल होने और निकृष्टता की मात्रा बढ़ जाने के कारण ही उत्पन्न होती है - rashtriya star ki vyaapak samasyaye naitik drishti dhoomil hone aur nikrishtata ki matra badh jaane ke kaaran utpanna hoti hain : प्रज्ञा सुभाषित
राष्ट्र को समृद्ध और शक्तिशाली बनाने के लिए आदर्शवाद, नैतिकता, मानवता, परमार्थ, देश भक्ति एवं समाज निष्ठा की भावना की जागृति नितान्त आवश्यक है - rashtra ko samriddh banane ke liye adarshvaad, naitikta, manavta, parmarth deshbhakti evam samaj nishtha i bhavna jagrit hona nitaant aavshyak hai : प्रज्ञा सुभाषित
सामाजिक, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्रों में जो विकृतियाँ, विपन्नताएँ दृष्टिगोचर हो रही हैं, वे कहीं आकाश से नहीं टपकी हैं, वरन् हमारे अग्रणी, बुद्धिजीवी एवं प्रतिभा सम्पन्न लोगों की भावनात्मक विकृतियों ने उन्हें उत्पन्न किया है - samajik, rashtriya aur antarrashtriya kshetron me jo vikritiya, vipannataye drishtigochar hain we aakash se nahi tapki varan ahamare agrini, buddhijeevi aur pratibhasapanna loho ki bhavatmak vikritiyon ne unhe utpanna kiya hai : प्रज्ञा सुभाषित
राष्ट्र का विकास, बिना आत्म बलिदान के नहीं हो सकता - rashtra ka vikas, bina aatm balidan ke nahi ho sakta : प्रज्ञा सुभाषित
राष्ट्रोत्कर्ष हेतु संत समाज का योगदान अपेक्षित है - rashtrotkarsh hetu sant samaj ka yogdaan apekshit hai : प्रज्ञा सुभाषित
राष्ट्र निर्माण जागरूक बुद्धिजीवियों से ही संभव है - rashra nirmaan jaagruk buddhijeeviyon se hi sambhav hai : प्रज्ञा सुभाषित
श्रेष्ठ मार्ग पर कदम बढ़ाने के लिए ईश्वर विश्वास एक सुयोग्य साथी की तरह सहायक सिद्ध होता है - shreshta marg par kadam badhaane ke liye ishvar vishwas ek suyogya sathi ki tarah sahayak siddh hota hai : प्रज्ञा सुभाषित
नास्तिकता ईश्वर की अस्वीकृति को नहीं, आदर्शों की अवहेलना को कहते हैं - naastikta ishwar ki aswikriti ko nahi, aadarsho ki avhelna ko kahte hain : प्रज्ञा सुभाषित
दिल खोलकर हँसना और मुस्कराते रहना चित्त को प्रफुल्लित रखने की एक अचूक औषधि है - dil kholkar hansana aur muskurate reha chitt ko prafullit rakhne ki ek achook aushadhi hai : प्रज्ञा सुभाषित
निरंकुश स्वतंत्रता जहाँ बच्चों के विकास में बाधा बनती है, वहीं कठोर अनुशासन भी उनकी प्रतिभा को कुंठित करता है - nirankush swatantrata jahan bachcho ke vikas me badha banti hai, wahin kathor anushaasan bhi unki pratibha ko kunhit karta hai. : प्रज्ञा सुभाषित
काम छोटा हो या बड़ा, उसकी उत्कृष्टता ही करने वाले का गौरव है - kaam chhota ho ya bada, uski utkrishta hi karna wale ka gaurav hai. : प्रज्ञा सुभाषित
हर व्यक्ति जाने या अनजाने में अपनी परिस्थितियों का निर्माण आप करता है - har vyakti jaane ya anjaane me apni paristhitiyo ka nirmaan aap karta hai : प्रज्ञा सुभाषित
अपने आपको जान लेने पर मनुष्य सब कुछ पा सकता है - apne aap ko jaan lene par manushya sab kuchh paa sakta hai. : प्रज्ञा सुभाषित
युग निर्माण योजना का आरम्भ दूसरों को उपदेश देने से नहीं, वरन् अपने मन को समझाने से शुरू होगा - yug nirmaan yojna ka aarambh doosro ko updesh dene se nahi, waran apne man ko samjhane se shuru hoga. : प्रज्ञा सुभाषित
दूसरों की निन्दा-त्रुटियाँ सुनने में अपना समय नष्ट मत करो - doosro ki ninda trutiyaan sunne mein samay vyarth mat karo : प्रज्ञा सुभाषित
जिनके भीतर-बाहर एक ही बात है, वही निष्कपट व्यक्ति धन्य है - Jin ke bheetar bahar ek hi baat hai, ve nishkapat vyakti dhany hain. : प्रज्ञा सुभाषित
जो तुम दूसरों से चाहते हो, उसे पहले तुम स्वयं करो - jo tum doosro se chahte ho, use pahle swayam karo. : प्रज्ञा सुभाषित