जैसे कोरे कागज पर ही पत्र लिखे जा सकते हैं, लिखे हुए पर नहीं, उसी प्रकार निर्मल अंत:करण पर ही योग की शिक्षा और साधना अंकित हो सकती है।

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जैसे कोरे कागज पर ही पत्र लिखे जा सकते हैं, लिखे हुए पर नहीं, उसी प्रकार निर्मल अंत:करण पर ही योग की शिक्षा और साधना अंकित हो सकती है। : Jaise kore kagaj par hi patra likhe ja sak, likhe hue ke oopar nahi, usi prakar nirmal antahkaran par hi yoga ki shisksha aur sadhna ankit ho sakti hai. - प्रज्ञा सुभाषितजैसे कोरे कागज पर ही पत्र लिखे जा सकते हैं, लिखे हुए पर नहीं, उसी प्रकार निर्मल अंत:करण पर ही योग की शिक्षा और साधना अंकित हो सकती है। : Jaise kore kagaj par hi patra likhe ja sak, likhe hue ke oopar nahi, usi prakar nirmal antahkaran par hi yoga ki shisksha aur sadhna ankit ho sakti hai. - प्रज्ञा सुभाषित

jaise kore kagaj par hi patra likhe ja sak, likhe hue ke oopar nahi, usi prakar nirmal antahkaran par hi yoga ki shisksha aur sadhna ankit ho sakti hai. | जैसे कोरे कागज पर ही पत्र लिखे जा सकते हैं, लिखे हुए पर नहीं, उसी प्रकार निर्मल अंत:करण पर ही योग की शिक्षा और साधना अंकित हो सकती है।