अपने बराबर या फिर अपने से समझदार व्यक्तियों के साथ सफ़र कीजिये, मूर्खो के साथ सफ़र करने से अच्छा है अकेले सफ़र करना - apne barabar ya fir samajhdaar vyaktion ke sathnsafar keejiye murkhon ke sath safar karne se achcha hai akele safar karna : गौतम बुद्ध

अपने बराबर या फिर अपने से समझदार व्यक्तियों के साथ सफ़र कीजिये, मूर्खो के साथ सफ़र करने से अच्छा है अकेले सफ़र करना। : Apne barabar ya fir samajhdaar vyaktion ke sathnsafar keejiye murkhon ke sath safar karne se achcha hai akele safar karna - गौतम बुद्ध

आप स्वयं से लड़ो, बाहरी दुश्मनों से क्या लड़ना? जो स्वयं पर विजय प्राप्त कर लेंगे उन्हें आनंद की प्राप्ति होगी - aap swayam se lado, baahri dushmano se kya ladnaa? jo swayam par vijay prapt kar leneg unhe aanand ki prapti hogi : महावीर स्वामी

आप स्वयं से लड़ो, बाहरी दुश्मनों से क्या लड़ना? जो स्वयं पर विजय प्राप्त कर लेंगे उन्हें आनंद की प्राप्ति होगी। : Aap swayam se lado, baahri dushmano se kya ladnaa? jo swayam par vijay prapt kar leneg unhe aanand ki prapti hogi - महावीर स्वामी

आप कभी इतने बूढ़े, इतने अनोखे, इतने जंगली नहीं हो सकते कि एक किताब उठकर बच्चे के सामने न पढ़ सकें - aap kabhi inte boodhe, itne anokhe, itne jangli nahi ho sakte ki ek kitaab uthaakar bachche ke saamne na padh sakein : डॉ ज़्यूस

आप कभी इतने बूढ़े, इतने अनोखे, इतने जंगली नहीं हो सकते कि एक किताब उठकर बच्चे के सामने न पढ़ सकें। : Aap kabhi inte boodhe, itne anokhe, itne jangli nahi ho sakte ki ek kitaab uthaakar bachche ke saamne na padh sakein - डॉ ज़्यूस

जैसे मोमबत्ती बिना आग के नहीं जल सकती, मनुष्य भी आध्यात्मिक जीवन के बिना नहीं जी सकता - jaise mombatti bina aag kenahi jal sakti , usi prakar manushya bhi bina adhyatmik jeevan ke nahi jee sakta. : गौतम बुद्ध

जैसे मोमबत्ती बिना आग के नहीं जल सकती, मनुष्य भी आध्यात्मिक जीवन के बिना नहीं जी सकता। : Jaise mombatti bina aag kenahi jal sakti , usi prakar manushya bhi bina adhyatmik jeevan ke nahi jee sakta. - गौतम बुद्ध

जितना एक मूर्ख व्यक्ति किसी बुद्धिमानी भरे उत्तर से नहीं सीख सकता उससे अधिक एक बुद्धिमान एक मूर्खतापूर्ण प्रश्न से सीख सकता है - jitna ek moorkh vyakti kis buddhimani bhare uttar se nahi seekh sakta usse adhik ek buddhiman ek morkhtapurna prashna seseekh sakta hai. : ब्रूस ली

जितना एक मूर्ख व्यक्ति किसी बुद्धिमानी भरे उत्तर से नहीं सीख सकता उससे अधिक एक बुद्धिमान एक मूर्खतापूर्ण प्रश्न से सीख सकता है। : Jitna ek moorkh vyakti kis buddhimani bhare uttar se nahi seekh sakta usse adhik ek buddhiman ek morkhtapurna prashna seseekh sakta hai. - ब्रूस ली

आम तौर पर लोग चीजें जैसी हैं उसके आदी हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की ज़रुरत है - aamtaur p ye cheeze jaisi hain uske aadi ho jate hain aur badlaav ke vichar se hi kaanpne lagte hain. humein is nishkriyta ki bhavna ko krantikari bhavna me badlne ki jaroorat hai. : सरदार भगत सिंह | Sardar Bhagat Singh

आम तौर पर लोग चीजें जैसी हैं उसके आदी हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की ज़रुरत है। : Aamtaur p ye cheeze jaisi hain uske aadi ho jate hain aur badlaav ke vichar se hi kaanpne lagte hain. humein is nishkriyta ki bhavna ko krantikari bhavna me badlne ki jaroorat hai. - सरदार भगत सिंह | Sardar Bhagat Singh

इंसान तभी कुछ करता है जब वो अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है, जैसाकि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे - insaan tabhi kuchhkarta hai jab wo apne kaam ke auchitya ko lekar sunishchit hota hai, jaise hum vidhansabha meinbomb fenkne ko lekar the. : सरदार भगत सिंह | Sardar Bhagat Singh

इंसान तभी कुछ करता है जब वो अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है, जैसाकि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे। : Insaan tabhi kuchhkarta hai jab wo apne kaam ke auchitya ko lekar sunishchit hota hai, jaise hum vidhansabha meinbomb fenkne ko lekar the. - सरदार भगत सिंह | Sardar Bhagat Singh

बुराई इसलिए नहीं बढती की बुरे लोग बढ़ गए है बल्कि बुराई इसलिए बढती है क्योंकि बुराई सहन करने वाले लोग बढ़ गये है - buraai isliye nahi badhti ki bure log badh gye hain, balki isliye badhti hai ki buraai sahne waale log jyad ho gye hain. : सरदार भगत सिंह | Sardar Bhagat Singh

बुराई इसलिए नहीं बढती की बुरे लोग बढ़ गए है बल्कि बुराई इसलिए बढती है क्योंकि बुराई सहन करने वाले लोग बढ़ गये है। : Buraai isliye nahi badhti ki bure log badh gye hain, balki isliye badhti hai ki buraai sahne waale log jyad ho gye hain. - सरदार भगत सिंह | Sardar Bhagat Singh

जो व्यक्ति विकास के लिए खड़ा है उसे हर एक रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी, उसमें अविश्वास करना होगा तथा उसे चुनौती देनी होगी - jo vyakti vikaas ke liye khadaa hai use har rudhivaadi cheez kiaalochna karni hogi, usme avishvaas karna hoga tatha use chunauti deni hogi. : सरदार भगत सिंह | Sardar Bhagat Singh

जो व्यक्ति विकास के लिए खड़ा है उसे हर एक रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी, उसमें अविश्वास करना होगा तथा उसे चुनौती देनी होगी। : Jo vyakti vikaas ke liye khadaa hai use har rudhivaadi cheez kiaalochna karni hogi, usme avishvaas karna hoga tatha use chunauti deni hogi. - सरदार भगत सिंह | Sardar Bhagat Singh

आपके पास जो कुछ भी है है उसे बढ़ा-चढ़ा कर मत बताइए, और ना ही दूसरों से इर्ष्या कीजिये। जो दूसरों से इर्ष्या करता है उसे मन की शांति नहीं मिलती - aapke pass jo kuchh bhi hai use badhha chadhakar nmat bataiye aur na hi doosro se irshya keejiye.jo ddoro se irshya krta hai use man ki shnati kabhi nahi milti. : गौतम बुद्ध

आपके पास जो कुछ भी है है उसे बढ़ा-चढ़ा कर मत बताइए, और ना ही दूसरों से इर्ष्या कीजिये। जो दूसरों से इर्ष्या करता है उसे मन की शांति नहीं मिलती। : Aapke pass jo kuchh bhi hai use badhha chadhakar nmat bataiye aur na hi doosro se irshya keejiye.jo ddoro se irshya krta hai use man ki shnati kabhi nahi milti. - गौतम बुद्ध

मैं कभी नहीं देखता की क्या किया जा चुका है; मैं हमेशा देखता हूँ कि क्या किया जाना बाकी है - main kabhi nahi dekhte ki kyakiya ja chuka hai, main hamesha dekhta hu ki kya kiya jana chahiye. : गौतम बुद्ध

मैं कभी नहीं देखता की क्या किया जा चुका है; मैं हमेशा देखता हूँ कि क्या किया जाना बाकी है। : Main kabhi nahi dekhte ki kyakiya ja chuka hai, main hamesha dekhta hu ki kya kiya jana chahiye. - गौतम बुद्ध

सभी बुरे कार्य मन के कारण उत्पन्न होते हैं। अगर मन परिवर्तित हो जाये तो क्या अनैतिक कार्य रह सकते हैं? - sabhi bure karya man ke kaaran utpanna hote hain . agar man pariartit ho jaye to bhala kahin anaitik karya rah sakte hain ? : गौतम बुद्ध

सभी बुरे कार्य मन के कारण उत्पन्न होते हैं। अगर मन परिवर्तित हो जाये तो क्या अनैतिक कार्य रह सकते हैं? : Sabhi bure karya man ke kaaran utpanna hote hain . agar man pariartit ho jaye to bhala kahin anaitik karya rah sakte hain ? - गौतम बुद्ध

हमेशा अपने वास्तिक रूप में रहो, खुद को व्यक्त करो, स्वयं में भरोसा रखो, बाहर जाकर किसी और सफल व्यक्तित्व को मत तलाशो और उसकी नक़ल मत करो - hamesha apne vaastvik roop me raho, khud ko vyakt karo, swayam me bharosa rakho, bahar jaakar kisi safalt vyakti ko mat talaasho aur mat uski nakal karo. : ब्रूस ली

हमेशा अपने वास्तिक रूप में रहो, खुद को व्यक्त करो, स्वयं में भरोसा रखो, बाहर जाकर किसी और सफल व्यक्तित्व को मत तलाशो और उसकी नक़ल मत करो। : Hamesha apne vaastvik roop me raho, khud ko vyakt karo, swayam me bharosa rakho, bahar jaakar kisi safalt vyakti ko mat talaasho aur mat uski nakal karo. - ब्रूस ली

अगर आप अपनी ज़िन्दगी से प्यार करते हैं तो वक़्त मत बर्बाद करें, क्योंकि वो वक़्त ही है जिससे ज़िन्दगी बनी होती है - agar aap apni zindgi se pyaar karte hain to waqt barbaad mat karein kyonki wo waqt hi hai jisse zindgi bani hoti hai. : ब्रूस ली

अगर आप अपनी ज़िन्दगी से प्यार करते हैं तो वक़्त मत बर्बाद करें, क्योंकि वो वक़्त ही है जिससे ज़िन्दगी बनी होती है। : Agar aap apni zindgi se pyaar karte hain to waqt barbaad mat karein kyonki wo waqt hi hai jisse zindgi bani hoti hai. - ब्रूस ली