प्रेम विस्तार है, स्वार्थ संकुचन है। इसलिए प्रेम जीवन का सिद्धांत है। वह जो प्रेम करता है जीता है। वह जो स्वार्थी है मर रहा है। इसलिए प्रेम के लिए प्रेम करो, क्योंकि जीने का यही एक मात्र सिद्धांत है। वैसे ही जैसे कि तुम जीने के लिए सांस लेते हो।

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प्रेम विस्तार है, स्वार्थ संकुचन है। इसलिए प्रेम जीवन का सिद्धांत है। वह जो प्रेम करता है जीता है। वह जो स्वार्थी है मर रहा है। इसलिए प्रेम के लिए प्रेम करो, क्योंकि जीने का यही एक मात्र सिद्धांत है। वैसे ही जैसे कि तुम जीने के लिए सांस लेते हो। : Prem vistaar hai, aatm sankuchan hai. isalie prem jeevan ka siddhaant hai. vah jo prem karata hai jeeta hai. vah jo svaarthee hai mar raha hai. isalie prem ke lie prem karo, kyonki jeene ka yahee ek maatr siddhaant hai. vaise hee jaise ki tum jeene ke lie saans lete ho. - स्वामी विवेकानन्दप्रेम विस्तार है, स्वार्थ संकुचन है। इसलिए प्रेम जीवन का सिद्धांत है। वह जो प्रेम करता है जीता है। वह जो स्वार्थी है मर रहा है। इसलिए प्रेम के लिए प्रेम करो, क्योंकि जीने का यही एक मात्र सिद्धांत है। वैसे ही जैसे कि तुम जीने के लिए सांस लेते हो। : Prem vistaar hai, aatm sankuchan hai. isalie prem jeevan ka siddhaant hai. vah jo prem karata hai jeeta hai. vah jo svaarthee hai mar raha hai. isalie prem ke lie prem karo, kyonki jeene ka yahee ek maatr siddhaant hai. vaise hee jaise ki tum jeene ke lie saans lete ho. - स्वामी विवेकानन्द

prem vistaar hai, aatm sankuchan hai. isalie prem jeevan ka siddhaant hai. vah jo prem karata hai jeeta hai. vah jo svaarthee hai mar raha hai. isalie prem ke lie prem karo, kyonki jeene ka yahee ek maatr siddhaant hai. vaise hee jaise ki tum jeene ke lie saans lete ho. | प्रेम विस्तार है, स्वार्थ संकुचन है। इसलिए प्रेम जीवन का सिद्धांत है। वह जो प्रेम करता है जीता है। वह जो स्वार्थी है मर रहा है। इसलिए प्रेम के लिए प्रेम करो, क्योंकि जीने का यही एक मात्र सिद्धांत है। वैसे ही जैसे कि तुम जीने के लिए सांस लेते हो।