मनुष्य बुद्धिमानी का गर्व करता है, पर किस काम की वह बुद्धिमानी-जिससे जीवन की साधारण कला हँस-खेल कर जीने की प्रक्रिया भी हाथ न आए।

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मनुष्य बुद्धिमानी का गर्व करता है, पर किस काम की वह बुद्धिमानी-जिससे जीवन की साधारण कला हँस-खेल कर जीने की प्रक्रिया भी हाथ न आए। : Manushya buddhimani par garv karta hai par vah buddhimaani kis kaam ki jisse jeevan ki sadharan kala hans khel kar jeene ki prakriya bhi hath na aaye - प्रज्ञा सुभाषितमनुष्य बुद्धिमानी का गर्व करता है, पर किस काम की वह बुद्धिमानी-जिससे जीवन की साधारण कला हँस-खेल कर जीने की प्रक्रिया भी हाथ न आए। : Manushya buddhimani par garv karta hai par vah buddhimaani kis kaam ki jisse jeevan ki sadharan kala hans khel kar jeene ki prakriya bhi hath na aaye - प्रज्ञा सुभाषित

manushya buddhimani par garv karta hai par vah buddhimaani kis kaam ki jisse jeevan ki sadharan kala hans khel kar jeene ki prakriya bhi hath na aaye | मनुष्य बुद्धिमानी का गर्व करता है, पर किस काम की वह बुद्धिमानी-जिससे जीवन की साधारण कला हँस-खेल कर जीने की प्रक्रिया भी हाथ न आए।