सेवा धर्म बहुत ही कठिन है यह तो कठिन काँटों के सेज पर सोने जैसा है - seva dharm bahut hee kathin hai yah to kathin kaanton ke sej par sone jaisa hai. : सरदार वल्लभ भाई पटेल | Sardar Vallabhbhai Patel

सेवा धर्म बहुत ही कठिन है यह तो कठिन काँटों के सेज पर सोने जैसा है। : Seva dharm bahut hee kathin hai yah to kathin kaanton ke sej par sone jaisa hai. - सरदार वल्लभ भाई पटेल | Sardar Vallabhbhai Patel

आपकी अच्छाई आपके मार्ग में बाधक है, इसलिए अपनी आँखों को क्रोध से लाल होने दीजिये और अन्याय का मजबूत हाथों से सामना कीजिये - aapki achchai aapke marg mein baadhak, isliye apni aankho ko krodh se laal hone deejiye aur anyaay ka majboot haathon se saamna kijiye. : सरदार वल्लभ भाई पटेल | Sardar Vallabhbhai Patel

आपकी अच्छाई आपके मार्ग में बाधक है, इसलिए अपनी आँखों को क्रोध से लाल होने दीजिये और अन्याय का मजबूत हाथों से सामना कीजिये। : Aapki achchai aapke marg mein baadhak, isliye apni aankho ko krodh se laal hone deejiye aur anyaay ka majboot haathon se saamna kijiye. - सरदार वल्लभ भाई पटेल | Sardar Vallabhbhai Patel

बेशक कर्म पूजा है किन्तु हास्य जीवन है। जो कोई भी अपना जीवन बहुत गंभीरता से लेता है, उसे एक तुच्छ जीवन के लिए तैयार रहना चाहिए। जो कोई भी सुख और दुःख का समान रूप से स्वागत करता है वास्तव में वही सबसे अच्छी तरह से जीता है - beshak karm pooja hai, kintu jeevan haasy hai. jo koi bhi ise gambheerta se leta hai wo tuchchh jeevan ke liye taiyaar ho jaaye : सरदार वल्लभ भाई पटेल | Sardar Vallabhbhai Patel

बेशक कर्म पूजा है किन्तु हास्य जीवन है। जो कोई भी अपना जीवन बहुत गंभीरता से लेता है, उसे एक तुच्छ जीवन के लिए तैयार रहना चाहिए। जो कोई भी सुख और दुःख का समान रूप से स्वागत करता है वास्तव में वही सबसे अच्छी तरह से जीता है। : Beshak karm pooja hai, kintu jeevan haasy hai. jo koi bhi ise gambheerta se leta hai wo tuchchh jeevan ke liye taiyaar ho jaaye - सरदार वल्लभ भाई पटेल | Sardar Vallabhbhai Patel

आपकी आदतें आपके मूल्य बन जाते हैं, आपके मूल्य आपकी नीयति बन जाती है - aapakee aadaten aapake mooly ban jaatee hain, aapake mooly aapakee neeyatee ban jaatee hain. : महात्मा गाँधी

आपकी आदतें आपके मूल्य बन जाते हैं, आपके मूल्य आपकी नीयति बन जाती है। : Aapakee aadaten aapake mooly ban jaatee hain, aapake mooly aapakee neeyatee ban jaatee hain. - महात्मा गाँधी

दुनिया हर किसी की ‘ जरूरत ‘ के लिए पर्याप्त है, लेकिन हर किसी के ‘ लालच ‘ के लिए नहीं - duniya har kisee kee har jaroorat ‘ke lie paryaapt hai, lekin har kisee ke ch laalach‘ ke lie nahin : महात्मा गाँधी

दुनिया हर किसी की ‘ जरूरत ‘ के लिए पर्याप्त है, लेकिन हर किसी के ‘ लालच ‘  के लिए नहीं। : Duniya har kisee kee har jaroorat ‘ke lie paryaapt hai, lekin har kisee ke ch laalach‘ ke lie nahin - महात्मा गाँधी

मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन - mera dharm saty aur ahinsa par aadhaarit hai. saty mera bhagavaan hai, ahinsa use paane ka saadhan. : महात्मा गाँधी

मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन। : Mera dharm saty aur ahinsa par aadhaarit hai. saty mera bhagavaan hai, ahinsa use paane ka saadhan. - महात्मा गाँधी

मैं मरने के लिए तैयार हूँ, पर ऐसी कोई वज़ह नहीं है जिसके लिए मैं मारने को तैयार हूँ - main marane ke lie taiyaar hoon, par aisee koee vazah nahin hai jisake lie main maarane ko taiyaar hoon. : महात्मा गाँधी

मैं मरने के लिए तैयार हूँ, पर ऐसी कोई वज़ह नहीं है जिसके लिए मैं मारने को तैयार हूँ। : Main marane ke lie taiyaar hoon, par aisee koee vazah nahin hai jisake lie main maarane ko taiyaar hoon. - महात्मा गाँधी

पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, और तब आप जीत जायेंगे - pahale vo tum par dhyaan nahin denge, phir vo tum par hansenge, phir vo tum se ladenge, aur phir tum jeet jaoge. : महात्मा गाँधी

पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, और तब आप जीत जायेंगे। : Pahale vo tum par dhyaan nahin denge, phir vo tum par hansenge, phir vo tum se ladenge, aur phir tum jeet jaoge. - महात्मा गाँधी

दुनिया में अधिकांश लोग इसलिए असफल हो जाते हैं क्योंकि विपरीत परिस्थितियां आने पर उनका साहस टूट जाता है और वह भयभीत हो जाते हैं - duniya mein adhikaansh log isalie asaphal ho jaate hain kyonki vipareet paristhitiyaan aane par unaka saahas toot jaata hai aur vah bhayabheet ho jaate hain. : स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

दुनिया में अधिकांश लोग इसलिए असफल हो जाते हैं क्योंकि विपरीत परिस्थितियां आने पर उनका साहस टूट जाता है और वह भयभीत हो जाते हैं। : Duniya mein adhikaansh log isalie asaphal ho jaate hain kyonki vipareet paristhitiyaan aane par unaka saahas toot jaata hai aur vah bhayabheet ho jaate hain. - स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

अपनी वर्तमान अवस्था के जिम्मेदार हम ही हैं, और जो कुछ भी हम होना चाहते हैं, उसकी शक्ति भी हमीं में है। यदि हमारी वर्तमान अवस्था हमारे ही पूर्व कर्मों का फल है, तो यह निश्चित है कि जो कुछ हम भविष्य में होना चाहते हैं, वह हमारे वर्तमान कार्यों द्वारा ही निर्धारित किया जा सकता है - apanee vartamaan avastha ke jimmedaar ham hee hain, aur jo kuchh bhee ham hona chaahate hain, usakee shakti bhee hameen mein hai. yadi hamaaree vartamaan avastha hamaare hee poorv karmon ka phal hai, to yah nishchit hai ki jo kuchh ham bhavishy mein hona chaahate hain, vah hamaare vartamaan kaaryon dvaara hee nirdhaarit kiya ja sakata hai. : स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

अपनी वर्तमान अवस्था के जिम्मेदार हम ही हैं, और जो कुछ भी हम होना चाहते हैं, उसकी शक्ति भी हमीं में है। यदि हमारी वर्तमान अवस्था हमारे ही पूर्व कर्मों का फल है, तो यह निश्चित है कि जो कुछ हम भविष्य में होना चाहते हैं, वह हमारे वर्तमान कार्यों द्वारा ही निर्धारित किया जा सकता है। : Apanee vartamaan avastha ke jimmedaar ham hee hain, aur jo kuchh bhee ham hona chaahate hain, usakee shakti bhee hameen mein hai. yadi hamaaree vartamaan avastha hamaare hee poorv karmon ka phal hai, to yah nishchit hai ki jo kuchh ham bhavishy mein hona chaahate hain, vah hamaare vartamaan kaaryon dvaara hee nirdhaarit kiya ja sakata hai. - स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

कर्म योग का रहस्य है कि बिना किसी फल की इच्छा के कर्म करना है, यह भगवान कृष्ण द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता में बताया गया है - karm yog ka rahasy hai ki bina kisee phal kee ichchha ke karm karana hai, yah bhagavaan krshn dvaara shreemadbenavadgeeta mein gaya hai. : स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

कर्म योग का रहस्य है कि बिना किसी फल की इच्छा के कर्म करना है, यह भगवान कृष्ण द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता में बताया गया है। : Karm yog ka rahasy hai ki bina kisee phal kee ichchha ke karm karana hai, yah bhagavaan krshn dvaara shreemadbenavadgeeta mein gaya hai. - स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आये, आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं - kisee din, jab aapake saamane koee samasya nahin aaye, to aap sunishchit ho sakate hain ki aap galat maarg par ja rahe hain. : स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आये, आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं। : Kisee din, jab aapake saamane koee samasya nahin aaye, to aap sunishchit ho sakate hain ki aap galat maarg par ja rahe hain. - स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

कुछ मत पूछो, बदले में कुछ मत मांगो। जो देना है वो दो, वो तुम तक वापस आएगा। परन्तु उसके बारे में अभी मत सोचो - kuchh mat poochho, kuchh mat maango. jo dena hai vo do, vo tum tak vaapas aa jaegee. lekin usake baare mein abhee tak kuchh nahin pata hai. : स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

कुछ मत पूछो, बदले में कुछ मत मांगो। जो देना है वो दो, वो तुम तक वापस आएगा। परन्तु उसके बारे में अभी मत सोचो। : Kuchh mat poochho, kuchh mat maango. jo dena hai vo do, vo tum tak vaapas aa jaegee. lekin usake baare mein abhee tak kuchh nahin pata hai. - स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

क्या तुम नहीं अनुभव करते कि दूसरों के ऊपर निर्भर रहना बुद्धिमानी नहीं हैं। बुद्धिमान व्यक्ति को अपने ही पैरों पर दृढतापूर्वक खड़ा होकर कार्य करना चहिए - kya aap anubhav nahin karate hain ki doosaron ke oopar nirbhar rahana buddhimaanee nahin hain. buddhimaan vyakti ko apane hee pairon par drdhataapoorvak banae hue kaary ko karana chaahie. : स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

क्या तुम नहीं अनुभव करते कि दूसरों के ऊपर निर्भर रहना बुद्धिमानी नहीं हैं। बुद्धिमान व्यक्ति को अपने ही पैरों पर दृढतापूर्वक खड़ा होकर कार्य करना चहिए। : Kya aap anubhav nahin karate hain ki doosaron ke oopar nirbhar rahana buddhimaanee nahin hain. buddhimaan vyakti ko apane hee pairon par drdhataapoorvak banae hue kaary ko karana chaahie. - स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो, ठीक उसी समय पर उसे करना ही चाहिये, नहीं तो लोगो का विश्वास उठ जाता है - jis samay jis kaam ke lie pratigya karo, theek usee samay par use karana hee chaahie, nahin to logo ka vishvaas uth jaata hai. : स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो, ठीक उसी समय पर उसे करना ही चाहिये, नहीं तो लोगो का विश्वास उठ जाता है। : Jis samay jis kaam ke lie pratigya karo, theek usee samay par use karana hee chaahie, nahin to logo ka vishvaas uth jaata hai. - स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ - ek samay mein ek kaam karo, aur aisa karo apanee pooree aatma usame daal do aur baakee sab kuchh bhool jao. : स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ। : Ek samay mein ek kaam karo, aur aisa karo apanee pooree aatma usame daal do aur baakee sab kuchh bhool jao. - स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

लोग तुम्हारी स्तुति करें या निन्दा, लक्ष्य तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहांत आज हो या युग में, परंतु तुम न्यायपथ से कभी भ्रष्ट न होना - log tumhaaree stuti karen ya ninda, lakshy tumhaara oopar krpaalu ho ya na ho, tumhaara dehaant aaj ho ya yug mein, haalaanki tum nyaayapath se kabhee bhrasht na ho. : स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

लोग तुम्हारी स्तुति करें या निन्दा, लक्ष्य तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहांत आज हो या युग में, परंतु तुम न्यायपथ से कभी भ्रष्ट न होना। : Log tumhaaree stuti karen ya ninda, lakshy tumhaara oopar krpaalu ho ya na ho, tumhaara dehaant aaj ho ya yug mein, haalaanki tum nyaayapath se kabhee bhrasht na ho. - स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

पीड़ितों की सेवा के लिए आवश्यकता पड़ने पर हम अपने मठ की भूमि तक भी बेच देंगे। हजारों असहाय नर नारी हमारे नेत्रों के सामने कष्ट भोगते रहें और हम मठ में रहें, यह असम्भव है। हम सन्यासी हैं,वृक्षों के नीचे निवास करेंगे और भिक्षा मांगकर जीवित रह लेंगे - peediton kee seva ke lie aavashyakata padane par ham apane math kee bhoomi tak bhee bechenge. hajaaron asahaay nar naaree hamaare netron ke saamane kasht bhogate rahen aur ham math mein rahen, yah asambhav hai. ham sanyaasee hain, vrkshon ke neeche nivaas karenge aur shiksha maangakar bache rahenge. : स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda

पीड़ितों की सेवा के लिए आवश्यकता पड़ने पर हम अपने मठ की भूमि तक भी बेच देंगे। हजारों असहाय नर नारी हमारे नेत्रों के सामने कष्ट भोगते रहें और हम मठ में रहें, यह असम्भव है। हम सन्यासी हैं,वृक्षों के नीचे निवास करेंगे और भिक्षा मांगकर जीवित रह लेंगे। : Peediton kee seva ke lie aavashyakata padane par ham apane math kee bhoomi tak bhee bechenge. hajaaron asahaay nar naaree hamaare netron ke saamane kasht bhogate rahen aur ham math mein rahen, yah asambhav hai. ham sanyaasee hain, vrkshon ke neeche nivaas karenge aur shiksha maangakar bache rahenge. - स्वामी विवेकानन्द | Swami Vivekananda