मसीहा को मरे जितना समय हो जाता है कर्मकांड उतना ही प्रबल हो जाता है। अगर आज बुद्ध जीवित होते तो तुम उन्हें पसंद न करते।

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मसीहा को मरे जितना समय हो जाता है कर्मकांड उतना ही प्रबल हो जाता है। अगर आज बुद्ध जीवित होते तो तुम उन्हें पसंद न करते। : Maseeha ko mare jitne samay ho jata hai, karmkand utba hi prabal ho jata hai. agar aaj budhha jeevit hote to aap unhe pasand nahi karte. - आचार्य रजनीश 'ओशो'मसीहा को मरे जितना समय हो जाता है कर्मकांड उतना ही प्रबल हो जाता है। अगर आज बुद्ध जीवित होते तो तुम उन्हें पसंद न करते। : Maseeha ko mare jitne samay ho jata hai, karmkand utba hi prabal ho jata hai. agar aaj budhha jeevit hote to aap unhe pasand nahi karte. - आचार्य रजनीश 'ओशो'

maseeha ko mare jitne samay ho jata hai, karmkand utba hi prabal ho jata hai. agar aaj budhha jeevit hote to aap unhe pasand nahi karte. | मसीहा को मरे जितना समय हो जाता है कर्मकांड उतना ही प्रबल हो जाता है। अगर आज बुद्ध जीवित होते तो तुम उन्हें पसंद न करते।