मनुष्य के भावों में प्रबल रचना शक्ति है, वे अपनी दुनिया आप बसा लेते हैं।

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मनुष्य के भावों में प्रबल रचना शक्ति है, वे अपनी दुनिया आप बसा लेते हैं। : Manushya ke bhavo mein prabal rachna shkati hai, ve apni duniya aap hi basaa leta hain. - प्रज्ञा सुभाषितमनुष्य के भावों में प्रबल रचना शक्ति है, वे अपनी दुनिया आप बसा लेते हैं। : Manushya ke bhavo mein prabal rachna shkati hai, ve apni duniya aap hi basaa leta hain. - प्रज्ञा सुभाषित

manushya ke bhavo mein prabal rachna shkati hai, ve apni duniya aap hi basaa leta hain. | मनुष्य के भावों में प्रबल रचना शक्ति है, वे अपनी दुनिया आप बसा लेते हैं।