मंदिर की गंभीर उदासी से बाहर भागकर बच्चे धूल में बैठते हैं, भगवान् उन्हें खेलता देखते हैं और पुजारी को भूल जाते हैं।

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मंदिर की गंभीर उदासी से बाहर भागकर बच्चे धूल में बैठते हैं, भगवान् उन्हें खेलता देखते हैं और पुजारी को भूल जाते हैं। : Mandir ki gambhie udaasi se bahar bhagkar bachche dhool mein baithte hain , bhagwan unhe khelte dekhta hai aur pujaari ko bhool jata hai - रवीन्द्रनाथ टैगोरमंदिर की गंभीर उदासी से बाहर भागकर बच्चे धूल में बैठते हैं, भगवान् उन्हें खेलता देखते हैं और पुजारी को भूल जाते हैं। : Mandir ki gambhie udaasi se bahar bhagkar bachche dhool mein baithte hain , bhagwan unhe khelte dekhta hai aur pujaari ko bhool jata hai - रवीन्द्रनाथ टैगोर

mandir ki gambhie udaasi se bahar bhagkar bachche dhool mein baithte hain , bhagwan unhe khelte dekhta hai aur pujaari ko bhool jata hai | मंदिर की गंभीर उदासी से बाहर भागकर बच्चे धूल में बैठते हैं, भगवान् उन्हें खेलता देखते हैं और पुजारी को भूल जाते हैं।