जब इंसान चिंता में होता है तो उस समय वह कोई भी रचनात्मक कार्य नहीं कर सकता।

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जब इंसान चिंता में होता है तो उस समय वह कोई भी रचनात्मक कार्य नहीं कर सकता। : Jab insaan chinta mein hota hai to us samay vah koi bhi rachnatmak karya nahi kar sakta. - ओरिसन स्‍वेट मार्डनजब इंसान चिंता में होता है तो उस समय वह कोई भी रचनात्मक कार्य नहीं कर सकता। : Jab insaan chinta mein hota hai to us samay vah koi bhi rachnatmak karya nahi kar sakta. - ओरिसन स्‍वेट मार्डन

jab insaan chinta mein hota hai to us samay vah koi bhi rachnatmak karya nahi kar sakta. | जब इंसान चिंता में होता है तो उस समय वह कोई भी रचनात्मक कार्य नहीं कर सकता।