किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आये, आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं - kisee din, jab aapake saamane koee samasya nahin aaye, to aap sunishchit ho sakate hain ki aap galat maarg par ja rahe hain. : स्वामी विवेकानन्द

किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आये, आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं। : Kisee din, jab aapake saamane koee samasya nahin aaye, to aap sunishchit ho sakate hain ki aap galat maarg par ja rahe hain. - स्वामी विवेकानन्द

कुछ मत पूछो, बदले में कुछ मत मांगो। जो देना है वो दो, वो तुम तक वापस आएगा। परन्तु उसके बारे में अभी मत सोचो - kuchh mat poochho, kuchh mat maango. jo dena hai vo do, vo tum tak vaapas aa jaegee. lekin usake baare mein abhee tak kuchh nahin pata hai. : स्वामी विवेकानन्द

कुछ मत पूछो, बदले में कुछ मत मांगो। जो देना है वो दो, वो तुम तक वापस आएगा। परन्तु उसके बारे में अभी मत सोचो। : Kuchh mat poochho, kuchh mat maango. jo dena hai vo do, vo tum tak vaapas aa jaegee. lekin usake baare mein abhee tak kuchh nahin pata hai. - स्वामी विवेकानन्द

हम जितना ज्यादा बाहर जायें और दूसरों का भला करें, हमारा हृदय उतना ही ज्यादा शुद्ध होगा और परमात्मा उसमें बसेंगे - ham jitana baahar ja rahe hain aur doosaron ka bhala karen, hamaara dil utana hee shuddh hoga aur paramaatma usamen basenge. : स्वामी विवेकानन्द

हम जितना ज्यादा बाहर जायें और दूसरों का भला करें, हमारा हृदय उतना ही ज्यादा शुद्ध होगा और परमात्मा उसमें बसेंगे। : Ham jitana baahar ja rahe hain aur doosaron ka bhala karen, hamaara dil utana hee shuddh hoga aur paramaatma usamen basenge. - स्वामी विवेकानन्द

कोई व्यक्ति कितना ही महान क्यों न हो, आँखें मूंदकर उसके पीछे न चलिए। यदि ईश्वर की ऐसी ही मंशा होती तो वह हर प्राणी को आँख, नाक, कान, मुँह, मस्तिष्क आदि क्यों देता? - koee bhee vyakti kitana hee mahaan kyon na ho, aankhen moondakar usake peechhe na chalie. yadi eeshvar kee aisee hee mansha hotee hai to vah har praanee ko aankh, naak, kaan, munh, mastishk aadi kyon deta hai? : स्वामी विवेकानन्द

कोई व्यक्ति कितना ही महान क्यों न हो, आँखें मूंदकर उसके पीछे न चलिए। यदि ईश्वर की ऐसी ही मंशा होती तो वह हर प्राणी को आँख, नाक, कान, मुँह, मस्तिष्क आदि क्यों देता? : Koee bhee vyakti kitana hee mahaan kyon na ho, aankhen moondakar usake peechhe na chalie. yadi eeshvar kee aisee hee mansha hotee hai to vah har praanee ko aankh, naak, kaan, munh, mastishk aadi kyon deta hai? - स्वामी विवेकानन्द

जिस क्षण मैंने ईश्वर को हर इंसान में बैठे महसूस किया है, उसी क्षण से में हर इंसान के सामने सम्मान से खड़ा होता हूँ और उनमे ईश्वर को देखता हूँ - jis kshan mainne eeshvar ko har insaan mein baithe mahasoos kiya hai, usee kshan se mein har insaan ke saamane sammaan se paida hota hai aur uname eeshvar ko dekhata hoon. : स्वामी विवेकानन्द

जिस क्षण मैंने ईश्वर को हर इंसान में बैठे महसूस किया है, उसी क्षण से में हर इंसान के सामने सम्मान से खड़ा होता हूँ और उनमे ईश्वर को देखता हूँ। : Jis kshan mainne eeshvar ko har insaan mein baithe mahasoos kiya hai, usee kshan se mein har insaan ke saamane sammaan se paida hota hai aur uname eeshvar ko dekhata hoon. - स्वामी विवेकानन्द

वह आदमी अमरत्व तक पहुंच गया है जो किसी भी चीज़ से विचलित नहीं होता है - vah aadamee amaratv tak pahunch gaya hai jo kisee bhee cheez se vichalit nahin hota hai. : स्वामी विवेकानन्द

वह आदमी अमरत्व तक पहुंच गया है जो किसी भी चीज़ से विचलित नहीं होता है। : Vah aadamee amaratv tak pahunch gaya hai jo kisee bhee cheez se vichalit nahin hota hai. - स्वामी विवेकानन्द