बाहर की दुनिया बिलकुल वैसी है, जैसा कि हम अंदर से सोचते हैं। हमारे विचार ही चीजों को सुंदर और बदसूरत बनाते हैं। पूरा संसार हमारे अंदर समाया हुआ है, बस जरूरत है चीजों को सही रोशनी में रखकर देखने की।

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बाहर की दुनिया बिलकुल वैसी है, जैसा कि हम अंदर से सोचते हैं। हमारे विचार ही चीजों को सुंदर और बदसूरत बनाते हैं। पूरा संसार हमारे अंदर समाया हुआ है, बस जरूरत है चीजों को सही रोशनी में रखकर देखने की। : Baahar kee duniya bilakul vaisee hai, jaisa ki ham andar se sochate hain. hamaare vichaar hee cheejon ko sundar aur badasoorat banaate hain. poora sansaar hamaare andar samaaya hua hai, bas jaroorat hai cheejon ko sahee roshanee mein rakhakar dekhane kee. - स्वामी विवेकानन्दबाहर की दुनिया बिलकुल वैसी है, जैसा कि हम अंदर से सोचते हैं। हमारे विचार ही चीजों को सुंदर और बदसूरत बनाते हैं। पूरा संसार हमारे अंदर समाया हुआ है, बस जरूरत है चीजों को सही रोशनी में रखकर देखने की। : Baahar kee duniya bilakul vaisee hai, jaisa ki ham andar se sochate hain. hamaare vichaar hee cheejon ko sundar aur badasoorat banaate hain. poora sansaar hamaare andar samaaya hua hai, bas jaroorat hai cheejon ko sahee roshanee mein rakhakar dekhane kee. - स्वामी विवेकानन्द

baahar kee duniya bilakul vaisee hai, jaisa ki ham andar se sochate hain. hamaare vichaar hee cheejon ko sundar aur badasoorat banaate hain. poora sansaar hamaare andar samaaya hua hai, bas jaroorat hai cheejon ko sahee roshanee mein rakhakar dekhane kee. | बाहर की दुनिया बिलकुल वैसी है, जैसा कि हम अंदर से सोचते हैं। हमारे विचार ही चीजों को सुंदर और बदसूरत बनाते हैं। पूरा संसार हमारे अंदर समाया हुआ है, बस जरूरत है चीजों को सही रोशनी में रखकर देखने की।