लोग बुद्ध को इतना प्रेम करते हैं कि वो उनका मज़ाक भी उड़ा सकते हैं. ये अथाह प्रेम कि वजह से है; इसलिए उनमे डर नहीं है।

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लोग बुद्ध को इतना प्रेम करते हैं कि वो उनका मज़ाक भी उड़ा सकते हैं. ये अथाह प्रेम कि वजह से है; इसलिए उनमे डर नहीं है। : Log buddh se itna prem karte hain ki unka mazaak bhi udaa sakte hain. ye aathaah prem ki vajah se hai isliye unme darr nahi hai. - आचार्य रजनीश 'ओशो'लोग बुद्ध को इतना प्रेम करते हैं कि वो उनका मज़ाक भी उड़ा सकते हैं. ये अथाह प्रेम कि वजह से है; इसलिए उनमे डर नहीं है। : Log buddh se itna prem karte hain ki unka mazaak bhi udaa sakte hain. ye aathaah prem ki vajah se hai isliye unme darr nahi hai. - आचार्य रजनीश 'ओशो'

log buddh se itna prem karte hain ki unka mazaak bhi udaa sakte hain. ye aathaah prem ki vajah se hai isliye unme darr nahi hai. | लोग बुद्ध को इतना प्रेम करते हैं कि वो उनका मज़ाक भी उड़ा सकते हैं. ये अथाह प्रेम कि वजह से है; इसलिए उनमे डर नहीं है।