जो छोटी-छोटी बातों में सच को गंभीरता से नहीं लेता है, उस पर बड़े मसलों में भी भरोसा नहीं किया जा सकता।

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जो छोटी-छोटी बातों में सच को गंभीरता से नहीं लेता है, उस पर बड़े मसलों में भी भरोसा नहीं किया जा सकता। : Jo chhoti chhoti baaton me sach ko gambheerta se nahi leta us par bade maamlo me bhi bharosa nahin kiya ja sakta. - अल्बर्ट आइन्स्टाइनजो छोटी-छोटी बातों में सच को गंभीरता से नहीं लेता है, उस पर बड़े मसलों में भी भरोसा नहीं किया जा सकता। : Jo chhoti chhoti baaton me sach ko gambheerta se nahi leta us par bade maamlo me bhi bharosa nahin kiya ja sakta. - अल्बर्ट आइन्स्टाइन

jo chhoti chhoti baaton me sach ko gambheerta se nahi leta us par bade maamlo me bhi bharosa nahin kiya ja sakta. | जो छोटी-छोटी बातों में सच को गंभीरता से नहीं लेता है, उस पर बड़े मसलों में भी भरोसा नहीं किया जा सकता।